हेपेटाइटिस बी एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है जो आपके लिवर (जिगर) पर असर डालता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे कोई कीड़ा (वायरस) आपके लिवर पर हमला कर देता है।
यह दो तरह का हो सकता है:
- कम समय वाला (Acute): इसमें वायरस आता है, और आपका शरीर उससे लड़कर उसे कुछ ही महीनों में बाहर निकाल देता है। ज्यादातर बड़े लोगों के साथ ऐसा ही होता है, और वे ठीक हो जाते हैं।
- लंबे समय वाला (Chronic): इसमें वायरस आपके लिवर में ही रह जाता है, अक्सर ज़िंदगी भर के लिए। यह खतरनाक होता है क्योंकि इससे लिवर को धीरे-धीरे काफी नुकसान पहुँच सकता है, जिससे लिवर खराब होना या लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। छोटे बच्चों और शिशुओं में इसके लंबे समय तक रहने का खतरा ज्यादा होता है।
यह कैसे फैलता है?
यह वायरस खून और शरीर के दूसरे तरल पदार्थों (जैसे वीर्य या योनि द्रव) से फैलता है। ये ऐसे फैलता है:
- असुरक्षित यौन संबंध: अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं।
- संक्रमित सुई या उपकरण: अगर कोई संक्रमित सुई (जैसे नशा करने वाली सुई) या टैटू या पियर्सिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले गंदे उपकरण का इस्तेमाल करता है।
- माँ से बच्चे में: अगर एक संक्रमित माँ बच्चे को जन्म देती है, तो वायरस बच्चे में जा सकता है।
- खून चढ़ाने से: अब ऐसा बहुत कम होता है क्योंकि खून की जाँच की जाती है, लेकिन पहले यह एक कारण था।
- व्यक्तिगत चीजों का साझा करना: जैसे रेजर, टूथब्रश या नेल कटर जिनमें संक्रमित खून हो सकता है।
यह खाँसने, छींकने, साथ खाना खाने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता।
इसके क्या लक्षण हैं?
कई बार लोगों को शुरुआत में कोई लक्षण दिखते ही नहीं। जब दिखते हैं, तो कुछ ऐसे हो सकते हैं:
- थकान
- बुखार
- भूख न लगना
- जी मिचलाना और उल्टी
- पेट दर्द (खासकर लिवर के पास)
- पीलिया (त्वचा और आँखों का पीला पड़ना)
- पेशाब का रंग गहरा होना
- शौच का रंग हल्का होना
बचाव और इलाज
हेपेटाइटिस बी से बचने का सबसे अच्छा तरीका टीका (वैक्सीन) लगवाना है। यह टीका बहुत असरदार और सुरक्षित है।
लंबे समय वाले हेपेटाइटिस बी का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाएँ (एंटीवायरल दवाएँ) हैं जो वायरस को कंट्रोल में रखने और लिवर को ज्यादा नुकसान से बचाने में मदद करती हैं।
अगर आपको लगता है कि आपको हेपेटाइटिस बी हो सकता है या आप इसके जोखिम में हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना और जाँच करवाना बहुत जरूरी है। सही समय पर पता चलने और इलाज से आप गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।