दमा, जिसे अस्थमा भी कहते हैं, फेफड़ों से जुड़ी एक पुरानी बीमारी है जिसमें सांस लेने में परेशानी होती है। यह तब होता है जब आपके फेफड़ों में हवा ले जाने वाली सांस की नलियां (वायुमार्ग) संकीर्ण हो जाती हैं, सूज जाती हैं, और उनमें अतिरिक्त बलगम बनने लगता है। इससे खांसी, घरघराहट (सीटी जैसी आवाज), सांस फूलना और छाती में जकड़न जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
दमा के लक्षण
दमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर उनमें शामिल हैं:
• सांस फूलना: खासकर व्यायाम या परिश्रम करने पर।
• खांसी: रात में या सुबह जल्दी, या ठंडी हवा में लगातार खांसी आना। यह बलगम वाली भी हो सकती है।
• घरघराहट (Wheezing): सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना।
• छाती में जकड़न: छाती पर दबाव या भारीपन महसूस होना।
• थकान: सांस लेने में ज़्यादा मेहनत लगने के कारण थकान महसूस होना।
दमा के कारण और ट्रिगर्स
दमा के सटीक कारण पूरी तरह से पता नहीं हैं, लेकिन कुछ कारक इसे शुरू कर सकते हैं या इसे बदतर बना सकते हैं:
• एलर्जी: पराग, धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवरों की रूसी, कुछ खाद्य पदार्थ।
• श्वसन संक्रमण: सर्दी, फ्लू या अन्य श्वसन संबंधी संक्रमण।
• वातावरणीय कारक: सिगरेट का धुआं, वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, कुछ रसायन, और इत्र।
• शारीरिक गतिविधि: व्यायाम-प्रेरित दमा।
• तनाव: अत्यधिक तनाव दमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
• आनुवंशिकी: यदि आपके परिवार में दमा का इतिहास है, तो आपको भी यह होने की संभावना बढ़ जाती है।
दमा का इलाज
दमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है ताकि आप सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकें। इलाज मुख्य रूप से दवाओं और जीवनशैली में बदलाव पर केंद्रित होता है:
1. दवाएं
दमा के इलाज में मुख्य रूप से इनहेलर्स और कुछ मौखिक दवाएं शामिल हैं:
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